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( स्वाध्याय हेतु )

श्री रामचन्द्र दिव्य सन्निधि

" धर्म का अस्त ही अध्यात्मिकता का प्रारंभ है | अध्यात्मिकता का अस्त वास्तविकता की शुरुआत है और वास्तविकता का अस्त ही वास्तविक आनंद है | जब वह भी मिट गया तो हम लक्ष्य पर पहुंच जाते हैं ।"
- बाबूजी महाराज -
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